युग कि पुकार
युग कि पुकार
अवनी चित्त चंचल व्यघ्र गंगा गौरी गाय भयाक्रांत पल प्रहर मे चित्कार हलचल बेटी कर रही विलाप!! एक ही था रावण पर्याप्त घर घर रावण दुर्योधन से भरा पड़ा कैसा कलयुग समाज!! चिर द्रोपदी का लुटता प्रतिदिन करुण क्रदन कृष्णा कि पुकार!! सम्बन्धो में संसय भ्रम भय बहुत सम्बन्धो का मिटता सम्मान मरती नैतिकता टूटती मर्यादाए संस्कार!! बेटी नारी औरत होती लज्जित रुदाली स्वर मे चमत्कार अवतार आस विश्वास!! उग्र उग्रता धर्म धंधा कानून प्रशासन अंधा खुनी हाथ शासक कि मंशा धोखा जन जन क़ो आघात!! चहु ऒर भ्रष्टाचार अंधकार फिर भी सत्ता सत्य निर्विकार!! लोक तंत्र में लोप तंत्र है लोक व्यभिचार कैसा समाज संसार!! माँ बाप का बाँटवारा करते संतान पृथ्वी उर्वरा उर्वरक विष से परिपूर्ण प्रकृति प्राण विनाश व्यवहार!! हाय कैसी संतान माँ देती अमृत जिनको विष देता नादान गाय पूज्य माता व्यथा से रोती विलखती बेहाल!! हाय रे कैसा कल युग स्वार्थ सिर्फ मानव गौ माता के सम्बन्धो का नाता बंधन वर्तमान!! दूध गौ माता का लेकर छोड़ देता सड़को गलियों में मैला खाती प्लास्टिक खाती दर दर दुत्कारती संतान!! मानवता कि माता गौ लज्जित हो पल प्रहर मनवता कल्याण का करती यज्ञ अनुष्ठान!! गंगा माता जन्म जीवन चक्र से मुक्ति दाता मोक्ष दायानी निर्मल निरझर अविरल बहती अविराम!! कल कल कलरव करती पतित पावनी का विश्वास टूटता,अमृत जैसा जल विषैला शत्रु प्राणी का बनती बहती उत्साह बिहीन हताश!! रोटी रोजी अविष्कार में ही बुढ़ा वरिष्ठ हो जाता राज्य राजनीती काल समय से लुटा ठगा जाता युग युवा ऊर्जा अंगार!! अपराध उन्माद तम कि गलियों में भटक विद्वाँसक बन जाता कलयुग युवा यथार्थ!! वेदना संवेदना हो गई समाप्त प्रकृति दूषित पर्यावरण प्रदूषित गंगा गाय गौरी व्यथित अविनी करती याचना प्रार्थना परम ब्रह्म से काल समय युग सत्यार्थ!! हें गिरधारी, बनवारी, वामन, राघव, राम, परशुराम,नरसिंघ, कच्छप, वराह,महादेव, महाकाल, महाबीर, बुद्ध, प्रभु यीशु, हज़रत पैग़म्बर गुरु नानक साहब ज्ञान विज्ञान प्रभु प्राण!! प्रकृति प्राणी उद्धारक अवतारी तुम पुनः पधारो समय समाज का करो परिमार्जन युग का करो पुनः निर्माण!! पथ तुम्हारा प्रकृति प्राणी प्राण निहारे कब आओगे शक्ति ईश्वर कि लिए युग निर्माता उद्धारक पालन हार!! सुन लो करुण पुकार समय काल कि गंगा गौरी गाय कि स्वार्थ वासना में लुटते मरते धर्म मर्म कि हें पुरुषोत्तम परमात्मा सार!! मथुरा,द्वारिका,अयोध्या छिर सागर छोड़ो कैलश महेन्द्राचल के परशुराम येरुशल्म के यीशु अवनी कण कण के भाग्य भगवान!! अवतारी तुम पुनः पधारो समय समाज का करो परिमार्जन युग का करो पुनरनिर्माण!! सत्य धर्म शैने शैने हो रहा समाप्त तेरे शब्दों ग्रंथो का होता परिहास!! गाल बजाता पंडित धर्म मर्म भविष्य बताते टी वीं मोबाईल नव सोसल मिडिया अर्थात सामाजिक संवाद सरोकार!! वाणी आकाश कि दिव्य दृष्टि संजय कि नारद के ब्रह्माण्ड अवतार अवतारी तुम पुनः पधारो युग समय समाज का करो पुनरनिर्माण!! नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!
