हृदय एक दर्पण *हृदय का दर्पण* हृदय एक दर्पण है,
हृदय एक दर्पण *हृदय का दर्पण* हृदय एक दर्पण है,
हृदय एक दर्पण है, समय समाज सम्बन्धों का चेहरा दिखता दर्पण में स्वयं को देखता मानव, हृदय भावों से भरा असली नकली चेहरा दर्पण, काल पल प्रहर मे!! असत्य नहीं बोलता, दर्पण हृदय सत्य ईश्वर का वास, द्वेष दम्भ ईर्ष्या हृदय धूल का मूल रचता जिसमे!! ईश्वर सत्य सार्थक करुणा, क्षमा सेवा दिव्य रूप स्वरूप, हृदय भाव के दर्पण पर ना चढ़ने दे धूल सत्य अदृश्य हो जायेगा जिसमे!! जीवन उद्देश्य पथ की दिशा दृष्टि, दर्पण हृदय साफ रहे,संपूर्ण दर्पण हृदय काया की छाया, मन तन सुंदर का आकर्षण जिसमे!! विकृति विकार आचरण व्यवहार का शांत व्याख्याता, दर्पण असत्य नहीं दृष्टिगत, जिसमे!! कालिख कुरूप दाग बता देता चंद्र रूप में छिपा देता दर्पण,जग मे!! निंदक असत्य का दर्पण निर्विकार, निश्छल दर्पण सम्बन्ध सिर्फ मन तन रूप स्वरूप सुंदर जिसमे!! निंदक नियरे रखिए आँगन कुटी छवाय, दर्पण आलोचक निंदक तमस अंधकार का प्रतिकार शक्ति जिसमे!! दर्पण भाव भवना क़ो अर्पण, दर्पण अवनी आसमान समर्पण जिसमे!! दर्पण हृदय हंस का आकर्षण, साफ हृदय को रख मन मंदिर रूप मन हृदय मंदिर स्वरूप परिभाषित जिससे!! हृदय दृष्टि दर्पण, दर्पण अपना साफ रख,मत चढ़ने दे धूल अपने दर्पण को रखो साफ स्पष्ट काल समय रूप दिखे जिसमे!! गर परत धूल की चढ़ गई, भय भ्रम पल प्रहर, रूप स्वच्छ भी विकृत संदेह संस्कार विलुप्त मानवता संस्कृत का ह्रास जिससे!!
