काग़ज़ और कलम
काग़ज़ और कलम
कभी कभी मेरा मन करता हैं की कलम उठाऊँ और सब कुछ सच सच लिख दूँ…
सच वाला कोई लेख या कविता और सच वाली कोई कहानी ही…
लेकिन मेरा प्रैक्टिकल मन मुझे वार्न करता हैं…
सच लिखने के नफ़े नुकसान को बेहद आसान भाषा में समझाने लगता हैं…
Corporate owned media और नेताओं की ताक़त को मैं भी समझ जाता हूँ…
मेरे जहन में कुछ बातें कौंधती हैं जिसे सच लिखनेवाले को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था…
मेरी कलम और काग़ज़ दोनों ही अब रोटी के इकोनॉमिक्स को समझने लगते हैं…
मेरी भी कलम फिर सच लिखने के ऐवज में शब्दों की हेराफ़ेरी करने लगती हैं…
रुपए के गिरने को अब मैं डॉलर के चढ़ने की बात को करने लगती हूँ और देश की आर्थिक हालात को वॉर इफ़ेक्ट से समझाने वाले लेख लिखने लगती हूँ…
हिंदू मुस्लिम भाई भाई ना लिखकर अब मैं सबका साथ सबका विकास लिखने लगती हूँ…
पॉलिसी फेलियर की बात ना लिखकर मैं वॉर आफ्टर इफेक्ट्स की बात लिखने लगता हूँ…
मैं मेरी कलम की ताक़त और काग़ज़ के वज़ूद को पहचानने लगा हूँ…
मेरा भी वक़्त अब बदल गया हैं…
कभी मेरी ईमानदारी को हिक़ारत से देखते बच्चें अब महँगी कारों से उतरता देख मेरे सक्सेस की बातें करने लगे हैं…
सोसाइटी में मेरा मान बढ़ गया हैं और बतौर चीफ़ गेस्ट मुझे छोटे मोटे इवेंट्स में बुलाया जाने लगा हैं…
अपने शुरुआती करियर में सच और ईमानदारी के कारण मैंने और मेरे परिवार ने बहुत नुकसान उठाया हैं…
मेरी जिंदगी ने इन सब की बड़ी क़ीमत चुकायी हैं…
मुझे अब ज़िन्दगी में आगे बढ़ना हैं…
प्रैक्टिकल होकर मैं मीडिया में अपनी कलम और काग़ज़ पर विकास की बातें लिखने लगा हूँ…
मेरे लिए पक्की सड़कें, घुमावदार फ्लाई ओवर्स, माइनिंग और फैक्ट्रीज़ के लिए जंगल काटते लोग मसीहा होने लगे हैं…
अब मेरी कलम और काग़ज़ ऐसे नेताओं और कॉरपोरेट्स के महिमा मंडन करने लगती हैं…
मेरा आई फ़ोन इस चारों ओर दिखते विकास को झट झट कैमरे में क़ैद करने लगता हैं…
कल के अख़बार और टीवी की ख़बरों में चारों ओर फैले इस विकास के मॉडल को दिखाना हैं…
सच्चे राष्ट्रभक्त की तरह देश के विकास की ख़बर को ह्वाट्सऐप ग्रुप में शेयर कर देश की प्रगति में अपना योगदान जरूर देंगे…
AI के इस युग में कलम की सच्चाई और काग़ज़ का वज़ूद बरकरार रहेगा और इतिहास ही नहीं बल्कि भविष्य भी तय करेगा…
