जुनूनी इश्क ने निकम्मा कर दिया
जुनूनी इश्क ने निकम्मा कर दिया
करते थे हम जुनून की हद तक उनको प्यार।
मगर हमने अपनी तरफ ना देखा एक बार।
नए-नए जो कॉलेज में गए कुछ उम्र का असर कुछ दोस्ती का असर।
कुछ दोस्तों की शरारत हमको भी हो गया जुनून ए इश्क करने का भूत सवार।
और हम कर बैठे एक नाज़नीन से प्यार।
पता नहीं क्या हुआ हमने तो कर दिया अपना भविष्य उसमें बर्बाद।
आज तक हम उसका खामियाजा भर रहे हैं।
अपनी जिंदगी को उनके रहमों करम पर जी रहे हैं।
गालिब जी के शेर की जादुई भाषा में
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के।

