ज़रूरी नहीं
ज़रूरी नहीं
जो हर दम हसे-हसाए,
जरूरी नहीं
वो सच में बस मन में भी खुशी बसाए।
दर्द भी भरा हो सकता है, चीख भी दबी हो सकती है,
मुस्काते चेहरे के लिए भी, मुस्कान अजनबी हो सकती है।
हँसने वाले की आँखें सिर्फ खुशी से ही नूरी नहीं,
चमकती आँखों में दर्द के आँसू कभी नहीं होते , ऐसा ज़रूरी नहीं।
बात-बात पर गुस्सा करना शामिल उसकी आदत में नहीं,
पर ज़रूरी नहीं
कि प्यार उसकी फितरत में नहीं।
कौन जाने प्यार जताने का किसका कैसा तरीका,
किसीकी बोली तीखी, तो किसीका मौन फीका।
प्यार में अधिकार से गुस्सा करना आदत बुरी नहीं,
और गुस्सा सिर्फ दुश्मनों के लिए ही है, ऐसा ज़रूरी नहीं।
वो हर दम चुप रहता है,
पर ज़रूरी नहीं ,
कि मन में शब्दों का लावा नहीं बहता है।
वो समझता है चुप्पी से दंगे रुकेंगे,
पर अन्याय रोकने को भी नहीं चूकेंगे।
उसकी चुप्पी मजबूरी नहीं,
अन्याय भी सह लें चुप रहकर, ऐसा ज़रूरी नहीं।
रोकर दुख बहाने वाले, बड़े ताने सहते हैं,
ज़रूरी नहीं,
कि हरदम बस वही टूटे रहते हैं।
रोकर मन की धूल साफ़ कर देते हैं,
और ताने कसने वालों के पत्थर से दिल में भी रोशनी भर देते हैं।
रो देने से हिम्मत अधूरी नहीं,
और खाली आँखों वाले मज़बूत हों, ऐसा ज़रूरी नहीं।
