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karan ahirwar

Abstract Tragedy Thriller

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karan ahirwar

Abstract Tragedy Thriller

जंग जारी है

जंग जारी है

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ये कहानी नहीं प्रेम की

ये तो है जंग की तकरार की

जो उसने की खुदसे बार बार

लड़ता रहा बो मगर कोई ना आया

पीता रहा खून खुद का ही

प्यास फिर भी नहीं मिटी है

जंग जारी है, पर्दा फिर भी नहीं हटी है


खुद को ही घायल करके

खुद को ही मलहम लगाए

पता नहीं कैसा है ये दर्द

चुभा है खंजर सीने में फिर भी

आह मुंह पर ना आए

करता रहा खून रोशनी धुंध फिर भी नहीं छटी है

जंग जारी है, पर्दा फिर भी नहीं हटी है


पता नहीं था इतना विशाल होगा ये युद्ध

खुद को खुदसे जीतने का ये युद्ध

अरे! हार तो एक तोहफा होगी मिले अगर

और जीत भी एक सजा होगी

सिल लिया है हर दर्द उसने

मुंह से आह फिर भी फटी है

जंग जारी है, पर्दा फिर भी नहीं हटी है।


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