STORYMIRROR

jyoti pal

Abstract

4  

jyoti pal

Abstract

जल, प्रकृति और पर्यावरण

जल, प्रकृति और पर्यावरण

1 min
352

जल, प्रकृति और पर्यावरण से है, स्वस्थ जीवन हमारा

तो क्यों अपनी दिनचर्या में अपनाएं कूड़ा कचरा फैलाना


जल, जंगल या जमींन सबको, सबको स्वच्छ बनाना

धर्म , कर्म,कर्तव्य है हमारा धरती माँ को स्वर्ग बनाना


जल से है जीवित हर एक प्राणी, जल से जंगल-जमींन

दुखद है प्रकृति का ढल रहा आज सुन्दर रूप महीन


मन कर्म धर्म से लापरवाह हो बदलता रहा मानव

पढ़कर भी अनपढ़ लगता है लगता है ऐसा हैवान


माना वक्त बदल रहा है समय के साथ-साथ सब कुछ

जल, प्रकृति पर्यावरण नहीं तो कैसे जीएगा इंसान।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract