Deepti Sharma
Tragedy
खत्म हुआ सिलसिला जज्बातों का,
टूट रही उम्मीदों की डोर है !
छमाछम बारिश में भी,
गहरे तूफानों का शोर है !
बर्दाश्त नहीं अब हल्की सी भी आहट,
किसी भी जाने अनजाने शख्स की !
क्योंकि अब हल्की आहटों से ही
शुरु होता चीखों का नया दौर है !
सपने
मोहलत
दूर से सलाम क...
हकीकत
जज्बात
जिंदगी
एहसास
श्रमिक
बेटी
गरीबी
इस समूचे ब्रह्मांड के हम इक छोटे से पिंड। इस समूचे ब्रह्मांड के हम इक छोटे से पिंड।
तुम अभी बड़ी शान से चलते हो सीना तानकर , आगे जाकर तुम्हें बड़े शर्म से सर झुकाना होगा तुम अभी बड़ी शान से चलते हो सीना तानकर , आगे जाकर तुम्हें बड़े शर्म से सर झुका...
हमने बसा लिया फिर उन्हें अपनी इन खामोशी से भरी निगाहों में। हमने बसा लिया फिर उन्हें अपनी इन खामोशी से भरी निगाहों में।
किसी एक के न होने से, खामोश हो जाती हैं सभी बातें। किसी एक के न होने से, खामोश हो जाती हैं सभी बातें।
प्यार मुझसे यार तुमने ही किया मैंने तो नहीं। प्यार मुझसे यार तुमने ही किया मैंने तो नहीं।
कैसी यह सभा है इसमें दुर्योधन के सिवा सभी हैं मौन। कैसी यह सभा है इसमें दुर्योधन के सिवा सभी हैं मौन।
चित्र बनाने के लिए सुडौल शरीर का बिम्ब सबसे आकर्षक था। चित्र बनाने के लिए सुडौल शरीर का बिम्ब सबसे आकर्षक था।
सुनो सच कहूँ..? तुमसे कहीं मिली नही ना ही तुम्हें कभी देखा। सुनो सच कहूँ..? तुमसे कहीं मिली नही ना ही तुम्हें कभी देखा।
खुद ही रोना है और खुद को ही चुप कराना होगा। खुद ही रोना है और खुद को ही चुप कराना होगा।
सोये पड़े हैं चैन से घोड़े जो बेंच कर, उनका जमीर दोस्त जगाना पड़ा मुझे। सोये पड़े हैं चैन से घोड़े जो बेंच कर, उनका जमीर दोस्त जगाना पड़ा मुझे।
पारस्परिक विश्वास का भाव अब लोगों में मिलना दुश्वार पारस्परिक विश्वास का भाव अब लोगों में मिलना दुश्वार
पर उसकी उम्मीद धुआं धुआं हो गई दहेज के नाम पर उसे मिला धोखा पर उसकी उम्मीद धुआं धुआं हो गई दहेज के नाम पर उसे मिला धोखा
इतना संयम कहां से पाऊं... हे प्रभु राह दिखा दो इतना संयम कहां से पाऊं... हे प्रभु राह दिखा दो
पांव में छाले लिए सहारा में हम चलते रहे। जागती आंखों के सपने थे हमें छलते रहे। पांव में छाले लिए सहारा में हम चलते रहे। जागती आंखों के सपने थे हमें छलते रहे...
जिनका पेट भरा हो उनको, भूख नजर कहां आती है। जिनका पेट भरा हो उनको, भूख नजर कहां आती है।
इतने लालायित क्यों हैं लोग युद्ध की ताज़ा तस्वीरें देखने के वास्ते। इतने लालायित क्यों हैं लोग युद्ध की ताज़ा तस्वीरें देखने के वास्ते।
गौण ,अहिंसा की बात हुई वायरल युद्ध की बात हुई। गौण ,अहिंसा की बात हुई वायरल युद्ध की बात हुई।
मानव तेरा अनमोल है जीवन क्यों... इसे तू धूएं में उडा रहा ? मानव तेरा अनमोल है जीवन क्यों... इसे तू धूएं में उडा रहा ?
अभी जिन्दा हूँ मैं और याद है सब कुछ मुझको। तुमको दूंगा सजा वैसी, जैसी दी है तुमने मुझको। अभी जिन्दा हूँ मैं और याद है सब कुछ मुझको। तुमको दूंगा सजा वैसी, जैसी दी है त...
न जाने कहां से कहां कब ले गई जिंदगी मैं आज भी कदमों के निशान ढूंढ रहा हूँ। न जाने कहां से कहां कब ले गई जिंदगी मैं आज भी कदमों के निशान ढूंढ रहा हूँ।