Deepti Sharma
Tragedy
खत्म हुआ सिलसिला जज्बातों का,
टूट रही उम्मीदों की डोर है !
छमाछम बारिश में भी,
गहरे तूफानों का शोर है !
बर्दाश्त नहीं अब हल्की सी भी आहट,
किसी भी जाने अनजाने शख्स की !
क्योंकि अब हल्की आहटों से ही
शुरु होता चीखों का नया दौर है !
सपने
मोहलत
दूर से सलाम क...
हकीकत
जज्बात
जिंदगी
एहसास
श्रमिक
बेटी
गरीबी
क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ? क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ?
कितने अपनों को उड़ा गई, यह कैसी हवा चली, देखो!! कितने अपनों को उड़ा गई, यह कैसी हवा चली, देखो!!
मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थकान भी वापस लेती हूँ... मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थ...
मरते रहे मरीज़, अव्यवस्थाओं का शोर था, ये देश रो रहा था,बस तूफानों का दौर था. मरते रहे मरीज़, अव्यवस्थाओं का शोर था, ये देश रो रहा था,बस तूफानों का दौर था.
हे प्रकृति की मासूम प्रतिनिधि! हम तुम्हारे अपराधी हैं.. हे प्रकृति की मासूम प्रतिनिधि! हम तुम्हारे अपराधी हैं..
तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर आ जाता हू तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर ...
कानून अब जी हजूरी की भाषा के अतिरिक्त कुछ नहीं। कानून अब जी हजूरी की भाषा के अतिरिक्त क...
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं। हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं।
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..। उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..।
जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर। जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर।
इबादत में हमारी असर नहीं रही या ईश्वर ने आँखें बंद कर रखी है। इबादत में हमारी असर नहीं रही या ईश्वर ने आँखें बंद कर रखी है।
कुछ बीती बातें हैं मन में, कब से जी रहा था कल में। कुछ बीती बातें हैं मन में, कब से जी रहा था कल में।
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
तुम किसे छोटी सी बात कहते हो? तुम किसे छोटी सी बात कहते हो?
कुछ विनष्ट करते हैं और सृष्टि तटस्थ रहती है! कुछ विनष्ट करते हैं और सृष्टि तटस्थ रहती है!
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे। बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे।
मुझे लगता है यह जीवन रंगमंच है और मैं बस एक कुशल अभिनेत्री हूँ। मुझे लगता है यह जीवन रंगमंच है और मैं बस एक कुशल अभिनेत्री हूँ।