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Yashvi bali

Classics Inspirational Thriller

4  

Yashvi bali

Classics Inspirational Thriller

ज़िंदगियाँ दो हैं…जी लो

ज़िंदगियाँ दो हैं…जी लो

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ज़िंदगियाँ दो हैं हमारी 

दो जिंदगियाँ होती हैं; 

एक जो हम हर दिन जीते हैं; 

हर दिन को जीने वाली ज़िंदगी हसीन होती है …

खूबसूरत सी सुबह में …

आँखो में भरे सपने बड़े रंगीन होते है …


चलने का नाम है ज़िंदगी 

तो चलते चले जाने का ..

ये एक मक़सद यूँ चलाता है 


मुठियों में भरी ताक़त…

दिल में भर उत्साह …

रुकना नहीं कहीं भी नयी राह दिखाता है …


यूँ चले छोटे छोटे कदम कब बड़े हो जाते हैं 

जो ख़ुशी और सुकून मिलता है 

उसकी अनमोल क़ीमत समझाते हैं …


दूसरी जो हम हर दिन जीना चाहते हैं; 

इन्ही दोनों के बीच मे 

तालमेल बैठाने को जीवन कहते हैं।


जीवन जो मिला कुछ अच्छा किया था ..

बस फिर आगे कोई ग़म का बादल ना छाये

ख़ुशियों की बरसात यूँ बरसती जाये ..

इतना सा काम दिया है उसने मुझे यशवी … 

तो क्यों ना तालमेल बिठाती जाऊँ 


और ये प्यारा सा संदेश 

उस ऊपर बैठे वाले का …

सब को समझाऊँ …

ज़िंदगियाँ दो मिलती हैं ..

एक नहीं …

यूँ जीयो और चलते चले जाओ 

ना रुको कभी 

ना रुकने का कभी 

पैग़ाम सुनाते जाओ …..


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