जिंदगी
जिंदगी
रफ्ता –रफ्ता है..ज़िन्दगी..
कब रफ्तार बढ़ेगी..
आगे बढने की चाहत में..
फिर एक दिन फिर यही रुकेगी !
ये जीवन नही है.. हमारा सहज..
कितने दिन लग जाते हैं.. महज़..
कोन आगे आया कोन नहीं..
इसी दोड़ में फस जाते सब..
दुविधा सी आन पड़ती हैं..
जब अपने से कोई आगे आया..
पर फिर देखो तुम उसकी माया..
हो जाता हैं..उदास मन हमारा !
फिर भी एक प्रेमल आस होती हैं..
जीवन में यहीं बात खास होती हैं !
अपना भी कोई आगे गया.. तो.
सबसे पहले हमारी ही ताली
अपनो के लिए दो हाथ होती हैं !
नफरत दिलो में कभी ना लाना..
इस बात को तुम कभी ना भूलना.
बस दिलों में रखना हमेशा प्यार..
यही मेरी कविता का सारवार !
सुख दुःख तो जीवन में हैं सबके..
जितनी खुशी पाना चाहो पा लेना..
चाहे अपने आसू छुपा लेना..
पर किसी की आखों में आसू...
कभी तुम अपनी वजह आने ना देना !
यहीं पर हैं ..हमारा सुखद संसार !
यहीं मेरी कविता का सारवार

