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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Romance Tragedy Classics

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Romance Tragedy Classics

जिंदगी

जिंदगी

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जिंदगी -------
धूप -छांव का संगम जिंदगी,एक हवा का झोंका जिंदगी ।
गम, मुश्किलें, असफलताएं,साथ अपने लिए जिंदगी ।
कही, अनकही बातों की लिखी किताब सी जिंदगी ।
निश्चित कोई ठिकाना नहीं,पानी का बुलबुला जिंदगी।
रंजोगम में भी मुस्कुराए,वही तो है असली जिंदगी ।
सफर-दर-सफर हमसफर,मिला नेक हमसफर मजा जिंदगी ।
कभी अपनों, कभी परायों के वास्ते,जीते रहो जब तक मिली जिंदगी ।
मुकेश कुमार ऋषि वर्माग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश 2831119627912535


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