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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Romance Classics

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Romance Classics

पावस

पावस

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पावस 

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सावन की ठंडी फुहार ।

खुशियां लाई अपार ।।

नृत्य करे मन मयूर ।

कोयल गीत गाए मधुर ।।


नभ में काली घटा छाई ।

हृदय विरहन के उदासी लाई ।।

प्रीतम की याद घनी आई ।

शीतल बयार बहे सुखदाई ।।


धरती की बुझी प्यास ।

सूखे कंठ मिला अमृतरस।।

जागी एक नई आस ।

सुखमय हुई पावस ।।


- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

ग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश 283111

9627912535


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