जिन्दगी
जिन्दगी
जब खुशी में होती है
बड़ी अजीज लगती है जिन्दगी
जब गम का सैलाब आए तो
बड़ी अजीब लगती है जिन्दगी
और जैसे जैसे बीतती जाती है
तब एहसास होता है कि
क्या चीज है ये जिंदगी
लम्हा लम्हा बीत जाती है जिन्दगी
एहसासों का समन्दर बनती है जिन्दगी
कोई अपना बिछुड़ता है तो
एक कसक एक छटपटाहट
हो जाती है जिन्दगी
अंजानों की भीड़ मे खड़े हो तो
पहचाने चेहरों की मधुर याद
होती है जिन्दगी
जब दुखों का पहाड़ टूटता है तो
हाथ जोड़कर बंदगी
बन जाती है जिन्दगी।
