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Yashvi bali

Classics Inspirational

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Yashvi bali

Classics Inspirational

ज़िंदगी रुकती नहीं …

ज़िंदगी रुकती नहीं …

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ज़िंदगी कहाँ रुकी है 

चलती ही चली जाती है 

प्यार बाँट के …

ख़ुशी हासिल कर लो क्यूँकि …..

रुकी जब ये ज़िंदगी …

बस रूह ही है जो पछताती है 


मोमबती को भी आख़िर में ही पता चलता है …

कि उसे उस धागे ने ही ख़त्म किया 

जिसको …

वो सीने में छुपाये मुस्कुराती है

 

मौक़ा नहीं देती कभी …

मुड़ कर पीछे देखने का …

समझ जब तक आती है …

मिटा सके उस तस्वीर को …

ना मिटने वाले दाग बना जाती है 


शायद ये ही ..गुनाह कहलाते हैं 

अपने ही किए …

कुछ ग़लत कर्मों के …

जो फल हम भुगतते हैं …


काश एक रबर ऐसा बनाते 

तुम प्रभु …..

और मुझे एक पल ऐसा दे देते 

मिटा के उस तस्वीर को अपनी 

बना पाती वो छवि ….@यशवी 

जिस के लिए 

भेजा इस धरती में तुमने मुझे …


वादा है मेरा तुझ से ..प्रभु 

निराश नहीं करूँगी कभी …

दुनिया में तेरे प्यार की मूरत बन जाऊँगी …

अपना जीवन सफल बनाऊँगी …


ये ज़िंदगी 

जिस का नाम है चलना…

सिखलाती है बस यही 

जो भी अच्छा कर सको …

कर लेना …

ना रबर कोई बना मिटाने को 

ग़लतियों की तस्वीर …


ना रुकी कहीं …

और ना रुकने का…

पैग़ाम सभी को देती जाऊँगी …


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