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Rashmi Lata Mishra

Inspirational

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Rashmi Lata Mishra

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जीवन की नैया (०३)

जीवन की नैया (०३)

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जीवन सरल क्यों नहीं

जीवन सरल क्यों नहीं?

कठिनाइयों की डगर है

क्योंकि पात्र यहाँ मंचस्थ नहीं,

आरुढ़ वह सतत कर्तव्य पथ पर है

समय तीन घंटे का नहीं

पूरे जीवन का है।


कब कौन सी राह कहाँ रुके

किसको पता है?

प्रकृति के मौसम चार

तो जिन्दगी में मौसमों

की भरमार है,

प्रकृति बाध्य नहीं कि रंग

हमारी पसन्द के हों

हम बाध्य हैं कि रंग औरों

की पसन्द के भी हों।


कभी अर्थ, कभी व्यर्थ तो कभी

समर्थ का जंजाल है,

कहीं कर्तव्य, कहीं प्यार तो कहीं

अधिकार का सवाल है,

उस पर भी जीवन की साँसें

अनिश्चित

आज चल रही हैं,

कल? किसने देखा है मगर

फिर भी न जाने किन ख्वाबों

का है असर,

चाहे सभी सरल बने डगर

किन्तु अनिश्चित का

आकार क्या हो?


नाव कैसे तय करें

नदी की धार क्या हो,

प्रश्न का हक तो उसे भी नहीं

कर्तव्य पठारूढ मानव

ये न पूछ-

जीवन सरल क्यों नहीं?


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