जीवन की नाव
जीवन की नाव
पार लगाओ जीवन की नैया, प्यार और सद्भावना के चप्पू से,
डूबेगी नाव आपकी, आक्रोश व द्वेष के भार से।
दूर तक पहुँचोगे, ग़र हल्के होकर चलोगे,
ईर्षा और अनबन का बोझ उठा, बस गोते ही खाओगे।
अपने अंदर झांक कर ही, औरों को कुछ बोलो
भूल जाओ छुटपुट बातें, ख़ुशियों का ख़ज़ाना खोलो।
जिओ और जीने दो का सिद्धांत अपनाओ
चार दिन की ही है ज़िंदगी, मस्त रहो व ख़ुशियाँ लुटाओ।
