रिश्ता दोस्ती का
रिश्ता दोस्ती का
संभाल कर रखो इन रिश्तों को...
पल भर में टूट जाते हैं,
कुछ रूठ और कुछ छूट जाते हैं |
जिनको कुछ भी कहने की आज़ादी है,
ऐसे दोस्त मिलना, खुशनसीबी है |
इन रूठों को मनाना भी आसान है,
यहाँ न गिला- शिकवा, न किसी का एहसान है
यह गाड़ी कभी भी स्टॉर्ट करलो,
सबके लिए जगह है...जितने भी भर लो |
बिना मिलावट के...एक अलग ही नशा है,
दोस्ती के सुरूर में हर कोई डूबा है |
औपचारिकता के चक्कर में मत पड़ो,
जितना भी वक्त बचा है, इसको खुल कर जियो |
