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Sanjay Jain

Classics

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Sanjay Jain

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जीवन का लेखा जोखा

जीवन का लेखा जोखा

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हनन और दमन तुम दूसरों का कर रहे हो

उसकी आग में अपने भी जल रहे हैं

कब तक तुम दूसरो को रुलाओगे।


एक दिन इस आग में खुद भी जल जाओगे

और अपने किये पर बहुत पछताओगे

पर उस समय कुछ नहीं कर पावोगे।


कहते हैं उसके के घर में देर है अंधेर नहीं

जो अपने किये कर्मों से बच पाओगे

और बिना फल भोगे यहां से नहीं जा पाओगे।


बनाने वाले ने क्या संसार बनाया हैं

इसमें सभी को अपनी भूमिका निभाना है 

 जीवनखाते में कर्मों का हिसाब लिखना है

और उन्हें यहां पर चुकाना है

जीवन का ये चक्र हमें समझना है।

और दुनिया को इसके बारे में बताना है। 


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