जीवन का अटूट सत्य
जीवन का अटूट सत्य
जग अथाह, लहरों के बीच,
तट का नाविक ,यह जीवन है।
माया है यह, दर्शन है यह,
प्रकृति प्रदत्त,बंधन है।
मृत्यु सत्य है, मृत्यु अटल है,
जीवन का अंतिम चरण मृत्यु है।
मृत्यु की नैया पर ही,
जीव भव पार होता है।
चरैवेति चरैवेति जिंदगी,
मृत्यु ही बनी विश्राम स्थली।
मैली चादर को बदल कर,
कर्म भूमि में होता पदार्पण।
नव मास रहता कैद में,
जन्म लेता पुनः कर्मानुसार।
जीवन के कारवां में न मौज-मस्ती,
कर्म से ही शोभित होती उसकी हस्ती।
नव चेतना नव उर्जा का संचार नित,
जिंदगी की लहर में नहीं विश्राम ।
मृत्यु ही संसार का अटल सत्य है,
ज्ञान, ध्यान, आनंद में जीवन वरण।
जीवन के साथ मृत्यु सत्य स्वीकार कर,
फिर एक नया जन्म अविरल बहा।
तज दे संशय छोड़ दें निराशा,
कर्म भूमि में करले अच्छी आशा।
