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sargam Bhatt

Abstract Romance Inspirational

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sargam Bhatt

Abstract Romance Inspirational

जी चाहता है

जी चाहता है

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अब मुझे भी बीता हुआ कल,

भुलाने को जी चाहता है।

जो टूट गए थे सपने उसे फिर से,

सजाने को जी चाहता है।

अब मुझे भी बीता हुआ कल,

भुलाने को जी चाहता है।


बाहर रहकर तो मैंने,

दौलत खूब कमाई है।

अब परिवार के संग रहकर,

प्यार मांगने को जी चाहता है।

अब मुझे भी बीता हुआ कल,

भुलाने को जी चाहता है।


लोगों के संग रहकर मैंने,

अपनी हस्ती क्या बनाई है।

अब अपने लिए थोड़ी सी इज्जत,

कमाने को जी चाहता है।

अब मुझे भी बीता हुआ कल,

भुलाने को जी चाहता है।


एक दूसरे से दूर हो गए थे,

हम अपने अपने ईगो में।

अब थोड़ा पास रहकर,

एक दूसरे में खो जाने को जी चाहता है।

अब मुझे भी बीता हुआ कल,

भुलाने को जी चाहता है।


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