Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Umesh Shukla

Tragedy

4  

Umesh Shukla

Tragedy

झूठों की महफिल

झूठों की महफिल

1 min
275


झूठों की महफिल सज रही

अब सरेआम चारों ही ओर

सच बोलने के साहस को ही

गटक गया यहां झूठों का शोर

इसे समय का फेर कहूं

या मानूं बड़ा अभिशाप

झूठ बोलने की स्पर्धाएं

छिड़ीें. शेष न पश्चाताप

गुणवत्ता की बात करते वो

जोे खुद मानकों पर फेल

ऐसे में उपजी अराजकता पे

डालेंगे भला कौन नकेल

हे ईश्वर देश के लोगों को

इतना देना सन्मति अवश्य

युग के माहौल को पहचान

कर खुद तय करें भविष्य।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy