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Nisha Nandini Bhartiya

Inspirational

5.0  

Nisha Nandini Bhartiya

Inspirational

झोपड़ी

झोपड़ी

1 min
528


बड़े- बड़े महलों से तो,

यह झोपड़ी अच्छी है ।

न मिले खाने को भोजन,

पर जीवन में मस्ती है ।

न चिंता संचय करने की,

न चोरी होने की फिक्र है ।

बाढ़ की नहीं इन्हें चिंता,

न डर भूकंप से मरने का है ।

अधिक की इन्हें न लालसा ,

जो मिल गया सो खा लिया ।

गोद में सर रख धरती की,

जीवन अपना गुजार दिया ।

शिक्षा देते यह धनवानों को,

क्यों अपना अमन खोते हो ।

क्या लाए थे तुम धरती पर,

जो जोड़ जोड़ के रखते हो ।

संचय उतना ही अच्छा है,

जितना जीवन में हो उपयोग ।

क्यों गला काटते लोगों का,

मड़ते क्यों अपने सिर दोष ।

घड़ा पाप का भर जाने पर,

अंजाम बुरा उसका होगा ।

समय रहते तुम सीख ले लो,

पछताने से फिर कुछ न होगा ।


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