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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

जग का हर एक पिता

जग का हर एक पिता

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मेरे पिता धरती के भगवान, 

जिन पर मुझ को अभिमान, 

अभागा पुत्र बेरोजगार हुआ,

बेरोजगारी ने किया परेशान।


कहते जग का हर एक पिता, 

पुत्र या पुत्री के लिए रब सदा। 

संतानों की हर इच्छा पूरी की, 

करके सबकुछ अपना कुर्बान।


मेरे पिता सदा ही मेरे भगवान, 

जिन पर मुझे सदैव अभिमान। 

पिता जी सदा मेरी ही पहचान, 

बेरोजगार मैं तो वो भी परेशान। 


बेटे और पिता का अमर प्यार, 

अनमोल धरोहर जैसे हो यार। 

अमूल्य रिश्ता सच्चा लगा जो, 

दोनों होते एक-दूसरे की जान।


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