STORYMIRROR

Pradnya Kulkarni

Fantasy

3  

Pradnya Kulkarni

Fantasy

जब उड़ने का मन करे

जब उड़ने का मन करे

1 min
301

जब उड़ने का मन करे

उड़ आती हूँ मैं खुले गगन में


मेरे सपनों की रंगबिरंगी छटाएं

जब छाने लगे नीले आसमान में


ये धरती और अंबर भी पास लगने लगे

जब कल्पनाएँ मेरी, अपने पंख पसारे


एक उड़ान भरती हूँ जैसे मुझे मेरा जहाँ मिल गया

एक उड़ान ऐसी जैसे मानो पूरा आसमान मेरा हो गया.


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy