STORYMIRROR

Pradnya Kulkarni

Inspirational

4  

Pradnya Kulkarni

Inspirational

जंग

जंग

1 min
259

खुद की खुद से जंग छिड गई

मैं खुद ही खुद के खिलाफ हो गई


शायद नकारात्मकता का मायाजाल था

विशाल रुप लेकर आया था


डर गई मैं पलभर हिंमत हार गई

तभी अंर्तमन से आवाज आई


सकारात्मक सोच जाग गई

फिर दटकर हुआ मुकाबला


कैसे टिक पाती नकारात्मकता

हारकर धुएं सी उड़ गई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational