STORYMIRROR

Tanha Shayar Hu Yash

Abstract

5.0  

Tanha Shayar Hu Yash

Abstract

जब मुश्किलें झांक रही हो

जब मुश्किलें झांक रही हो

1 min
262



जब मुश्किलें झांक रही हो

दामन से बेदर्द संसार को ,

और तुम्हे भी पता ना चले

क्या बचा अब इंतज़ार को,

तुम पोंछ के आंसू है देना

भुला देना जालिम संसार को।


कर के विरह अलाप तुम

पहन अग्नि की इस राखा को,

देख सूरज के ताप को जलना

छाव से बचाकर आप को,


छोड़ देना आराम का जीवन

सह लेना मिले हर श्राप को।


कर्म का मर्म जान लेना तुम

छोड़ सारे भोग विलाश को,

सिद्धियां प्राप्त करने में लगना

और मिटा देना हर संताप को,





Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract