Mohni Shriwas
Children
जामुन देखो काली काली,
लगी हुई है डाली डाली।
डाल पकड़कर इसे हिलाएं,
जामुन गिरती तब टप टप टप।
बीनो भाई झटपट झटपट,
चलो चलें अब नदी किनारे।
धो धोकर अब खाएँ प्यारे।।
साफ-सफाई और स...
आओ भैया पेड़ ल...
जामुन
फल
गुब्बारे वाला
सब्जी
मोर
गुणकारी सब्जि...
सब्जी वाला
दीवाली
बच्चे खेलें घर - घर नांव, छप - छप करते अपने पांव। बच्चे खेलें घर - घर नांव, छप - छप करते अपने पांव।
माँ ने खोए लाडले, बेटों ने निज तात। आजादी ऐसे मिली, सुन लो मेरे भ्रात।। माँ ने खोए लाडले, बेटों ने निज तात। आजादी ऐसे मिली, सुन लो मेरे भ्रात।।
हरी भरी इस प्रकृति को स्वतंत्रता से खिलने दो॥ हरी भरी इस प्रकृति को स्वतंत्रता से खिलने दो॥
किया आविष्कार उसने कुर्सी का ऐसी, जिस पर बैठा कर मरीज़ को जान लेता था। किया आविष्कार उसने कुर्सी का ऐसी, जिस पर बैठा कर मरीज़ को जान लेता था।
कल्पना ही साकार हैं होती इस दुनिया में हर घड़ी। कल्पना ही साकार हैं होती इस दुनिया में हर घड़ी।
देश तो ऐसे अनेक हैं, धरती अपनी नेक है ! देश तो ऐसे अनेक हैं, धरती अपनी नेक है !
सब मिल करते हंसी ठिठोली, सीमा पर सहते हम गोली।। सब मिल करते हंसी ठिठोली, सीमा पर सहते हम गोली।।
फिर आओ तुम मूर्त रुप धर, दुनिया को यह आस है।। फिर आओ तुम मूर्त रुप धर, दुनिया को यह आस है।।
सब कुछ रहता एक तरफ़ तब, स्वेटर- कोट ही बनते गहने।। सब कुछ रहता एक तरफ़ तब, स्वेटर- कोट ही बनते गहने।।
तब कान्हा ने ख़ुद को बांधा, अद्भुत दिखा नज़ारा ऐसा दृश्य मनोहर था.... तब कान्हा ने ख़ुद को बांधा, अद्भुत दिखा नज़ारा ऐसा दृश्य मनोहर था....
अलग है बोली, अलग है भाषा, दुश्मन को मिल मार भगाता। ऐसा अपना देश है ! अलग है बोली, अलग है भाषा, दुश्मन को मिल मार भगाता। ऐसा अपना देश है !
प्यार दें, मान दें, सम्मान दें जीवन के आखिरी पलों में यही हमें संतृप्ति देंगे। प्यार दें, मान दें, सम्मान दें जीवन के आखिरी पलों में यही हमें संतृप्ति ...
मामाजी दिल्ली से आए उड़नकार थी अपनी लाए। मामाजी दिल्ली से आए उड़नकार थी अपनी लाए।
शबरी ने जब सुखमय सांस ली तब मुनिवर अंतर्धान हुए। शबरी ने जब सुखमय सांस ली तब मुनिवर अंतर्धान हुए।
इसीलिए मैं कहता हूँ सदा कल्पना कुछ भी करते रहें। इसीलिए मैं कहता हूँ सदा कल्पना कुछ भी करते रहें।
नैतिकता के मूल पाठ को, फ़िल्मों में अपनाया जाए।। नैतिकता के मूल पाठ को, फ़िल्मों में अपनाया जाए।।
ख़्वाबों और स्वतंत्रता के बीच फर्क को वो तुम ना करना जो भूल चूक हमने किया तुम्हारे ख़्वाबों और स्वतंत्रता के बीच फर्क को वो तुम ना करना जो भूल चूक हमने किय...
तुम महक उठो, गमक उठो कि जैसे इत्र ! तुम महक उठो, गमक उठो कि जैसे इत्र !
नयन पटल बरसा रहे अब, अनवरत जल की धारा है। नयन पटल बरसा रहे अब, अनवरत जल की धारा है।
सब टीवी पर इस पर सीरियल आता रोज़ देखा करते हम। सब टीवी पर इस पर सीरियल आता रोज़ देखा करते हम।