Mohni Shriwas
Children
जामुन देखो काली काली,
लगी हुई है डाली डाली।
डाल पकड़कर इसे हिलाएं,
जामुन गिरती तब टप टप टप।
बीनो भाई झटपट झटपट,
चलो चलें अब नदी किनारे।
धो धोकर अब खाएँ प्यारे।।
साफ-सफाई और स...
आओ भैया पेड़ ल...
जामुन
फल
गुब्बारे वाला
सब्जी
मोर
गुणकारी सब्जि...
सब्जी वाला
दीवाली
दोनों ने इस गर्मी को भी स्वाद से भर दिया, इस मौसम ने तो दिलों को दिलों से जोड़ दिया। दोनों ने इस गर्मी को भी स्वाद से भर दिया, इस मौसम ने तो दिलों को दिलों से जो...
रब्बा भी चर्चा का विषय बन जाता था! हर कोई रब्बा में बैठने के लिए ललचाचा था। रब्बा भी चर्चा का विषय बन जाता था! हर कोई रब्बा में बैठने के लिए ललचाचा था।
उस मिट्टी को चूम सीना फोलादों सा हो जाए, ऐसा भारत देश है मेरा। उस मिट्टी को चूम सीना फोलादों सा हो जाए, ऐसा भारत देश है मेरा।
क्यों सोच नहीं सही हो सकता है काश यह नवरात्रि रोज आए माँ, काश यह नवरात्रि रोज आए माँ। क्यों सोच नहीं सही हो सकता है काश यह नवरात्रि रोज आए माँ, काश यह नवरात्रि रोज...
वो बल्बों को फोड़ना, वो आमों को तोड़ना। वो पहले जूते, वो पहली कॉपी। वो बल्बों को फोड़ना, वो आमों को तोड़ना। वो पहले जूते, वो पहली कॉपी।
प्रियतम मेरे तुम भी लिखना क्या ये तुम्हारे क़ाबिल है। प्रियतम मेरे तुम भी लिखना क्या ये तुम्हारे क़ाबिल है।
खुशी की दीप जलाओ मेरे नंदलाल आए हैं मेरे गोपाल आए हैं। खुशी की दीप जलाओ मेरे नंदलाल आए हैं मेरे गोपाल आए हैं।
अंग्रेजों की धरती पर जिसने, आज़ादी का पहला बिगुल बजाया था, अंग्रेजों की धरती पर जिसने, आज़ादी का पहला बिगुल बजाया था,
हवा की तरह उड़ते जाओ वातावरण से जुड़ते जाओ! हवा की तरह उड़ते जाओ वातावरण से जुड़ते जाओ!
एक पिता के एक पुत्र से विमुख होने से पहले एक आखरी सांस ले लेने देना मां। एक पिता के एक पुत्र से विमुख होने से पहले एक आखरी सांस ले लेने देना मां।
मन बुद्धि से कर्मशील बन गुणवान कहलवाएं। शिक्षा देते जाएं आगे बढ़ते जाएं। मन बुद्धि से कर्मशील बन गुणवान कहलवाएं। शिक्षा देते जाएं आगे बढ़ते जाएं।
जब दुःख के दलदल में,आकंठ डूबे तब भी विचलित मत होना तुम,ये धुँध हटेगा भी। जब दुःख के दलदल में,आकंठ डूबे तब भी विचलित मत होना तुम,ये धुँध हटेगा भी।
ना सोचा कभी वो करना है हमें अब ख्वाहिशों को पूरा करने की ज़िद है हमें। ना सोचा कभी वो करना है हमें अब ख्वाहिशों को पूरा करने की ज़िद है हमें।
है एक मा की जात तुम आई थी मेरे लिए वो जात लेकर। है एक मा की जात तुम आई थी मेरे लिए वो जात लेकर।
म भाग्यशाली हमारे घर का सदस्य देश के खातिर कुर्बानी दिया। म भाग्यशाली हमारे घर का सदस्य देश के खातिर कुर्बानी दिया।
और अपनी असहायता पर रोते देखा है। मैंने बच्चे में पूरे का पूरा आदमी देखा है। और अपनी असहायता पर रोते देखा है। मैंने बच्चे में पूरे का पूरा आदमी देखा है।
पीतल की परात को लाकर, छुपा दिया फिर चौका चूल्हा। पीतल की परात को लाकर, छुपा दिया फिर चौका चूल्हा।
जो केवल है हमारा प्यारा बचपन, बचपन, बचपन। जो केवल है हमारा प्यारा बचपन, बचपन, बचपन।
सुबह-शाम दाना लाती है , उसके लिए विश्राम कहां कब ? सुबह-शाम दाना लाती है , उसके लिए विश्राम कहां कब ?
जो केवल है हमारा प्यारा बचपन, बचपन, बचपन l जो केवल है हमारा प्यारा बचपन, बचपन, बचपन l