Mohni Shriwas
Children
आओ भैया पेड़ लगाएं,
धरती में हरियाली लाएं।
हरी भरी धरती हो जाती,
सुन्दर लगती सबको भाती।
सबको भाती बादल का भी
मन ललचाती,
सबकोअपनी ओर लुभाती
आओ भैया पेड़ लगाएं।
साफ-सफाई और स...
आओ भैया पेड़ ल...
जामुन
फल
गुब्बारे वाला
सब्जी
मोर
गुणकारी सब्जि...
सब्जी वाला
दीवाली
प्यारासा यें बचपन , मांगू भगवानसें बार बार । बिते पल आते याद,बनकर बच्चा! आज भी मैं खेलूँ। प्यारासा यें बचपन , मांगू भगवानसें बार बार । बिते पल आते याद,बनकर बच्चा! आज ...
दीपों का त्यौहार है, आया चारों ओर उजियाला है, लाया द्वेष - भाव मिटाने देखो दिवाली का दीपों का त्यौहार है, आया चारों ओर उजियाला है, लाया द्वेष - भाव मिटाने देखो...
जब कदम फिर तुम्हारे इसमें पड़ जाएंगे, ये सूना उपवन फिर से महक जाएगा। जब कदम फिर तुम्हारे इसमें पड़ जाएंगे, ये सूना उपवन फिर से महक जाएगा।
वो छुपा छुपी का खेल, वो मछली जल की रानी। वो छुपा छुपी का खेल, वो मछली जल की रानी।
दीपों का त्योहार दिवाली पवित्र पावन त्योहार दिवाली! दीपों का त्योहार दिवाली पवित्र पावन त्योहार दिवाली!
आजकल बैठे बैठे ख्याल कभी ये आता है। कहाँ गया वो बचपन मेरा जिससे मेरा नाता है। आजकल बैठे बैठे ख्याल कभी ये आता है। कहाँ गया वो बचपन मेरा जिससे मेरा नाता है।
सूरज दस्तक देता है जब घर द्वारे पर अपने। सूरज दस्तक देता है जब घर द्वारे पर अपने।
धन्य हैं तेरे मात-पिता तूज जैसी सिंद्मगणी ने जन्म दियों। धन्य हैं तेरे मात-पिता तूज जैसी सिंद्मगणी ने जन्म दियों।
मम्मी बस हम को ना और सताना आ गया हम को सबक पढ़ना - पढ़ाना । मम्मी बस हम को ना और सताना आ गया हम को सबक पढ़ना - पढ़ाना ।
सिर्फ यह चाहती हूं हो सके तो लौटा दो मेरा बचपन का उम्र।वो घड़ी, वो सुनहरे पल। सिर्फ यह चाहती हूं हो सके तो लौटा दो मेरा बचपन का उम्र।वो घड़ी, वो सुनहरे पल...
इनका सामना तुम हमेशा करना आफत नहीं, एक मौका समझना। इनका सामना तुम हमेशा करना आफत नहीं, एक मौका समझना।
एक पतंग ला दो पापा जी मैं भी आज उड़ाऊँगा । एक पतंग ला दो पापा जी मैं भी आज उड़ाऊँगा ।
जीवन सुखी बनाएँ हम, आओ पेड़ लगाएँ हम। जीवन सुखी बनाएँ हम, आओ पेड़ लगाएँ हम।
चलो सजाए धरती माँँ को, हम अपने बलिदान से। हम बच्चे हिंदुस्तान के। चलो सजाए धरती माँँ को, हम अपने बलिदान से। हम बच्चे हिंदुस्तान के।
मीठी वाणी करती मीठी बात कड़वापन वाणी का जहर है मीठी वाणी करती मीठी बात कड़वापन वाणी का जहर है
आज बहुत याद आते हैं, जब हम हो गए पचपन के। आज बहुत याद आते हैं, जब हम हो गए पचपन के।
अपने साथ खिलखिलाती खुशियों का पैगाम लती है और ज़िदंगी का एक सबक सिखला जाती हैं। अपने साथ खिलखिलाती खुशियों का पैगाम लती है और ज़िदंगी का एक सबक सिखला जाती है...
लेकिन एक चीज सीख ली सोचते सोचते कि मां-बाप के पास ही जन्नत के नजारे रहा करते थे। लेकिन एक चीज सीख ली सोचते सोचते कि मां-बाप के पास ही जन्नत के नजारे रहा करते...
वरना किस्मत में, मेरी गम हज़ार रहते हैं ! वरना किस्मत में, मेरी गम हज़ार रहते हैं !
समझदार न बन जाना तुम, प्रेम-प्रफुल्ल मन से विनीत स्वभाव अपनाना तुम। समझदार न बन जाना तुम, प्रेम-प्रफुल्ल मन से विनीत स्वभाव अपनाना तुम।