Mohni Shriwas
Children
आओ भैया पेड़ लगाएं,
धरती में हरियाली लाएं।
हरी भरी धरती हो जाती,
सुन्दर लगती सबको भाती।
सबको भाती बादल का भी
मन ललचाती,
सबकोअपनी ओर लुभाती
आओ भैया पेड़ लगाएं।
साफ-सफाई और स...
आओ भैया पेड़ ल...
जामुन
फल
गुब्बारे वाला
सब्जी
मोर
गुणकारी सब्जि...
सब्जी वाला
दीवाली
सख्त हो के उसे समझाते बच्चे तो होते है माता पिता की छाया सख्त हो के उसे समझाते बच्चे तो होते है माता पिता की छाया
अब आया है जीने का मजा फिल्मों से अब न होंगे जुदा। अब आया है जीने का मजा फिल्मों से अब न होंगे जुदा।
जानकी बार मिथिला का कण - कण खिलाती है बेटी जानकी बार मिथिला का कण - कण खिलाती है बेटी
जाह्नवी बंग्लोज़ में बज रहे ढ़ोल और शहनाई, मालव का जन्म दिवस है भाई। जाह्नवी बंग्लोज़ में बज रहे ढ़ोल और शहनाई, मालव का जन्म दिवस है भाई।
एलियन ने प्यार से मुझे उठाया और खेल रहा जैसे में हूँ गुड़िया। एलियन ने प्यार से मुझे उठाया और खेल रहा जैसे में हूँ गुड़िया।
जब भी किसी मोड़ पर साया भी रास ना आया। साथ पिता का मैंने हरदम आसपास ही पाया।। जब भी किसी मोड़ पर साया भी रास ना आया। साथ पिता का मैंने हरदम आसपास ही पाया।।
फिर से अपने अफसाने की किताब लिखते हैं। फिर से अपने अफसाने की किताब लिखते हैं।
हाय हैलो तक सीमित रखो फेसबुक का संसार। हाय हैलो तक सीमित रखो फेसबुक का संसार।
सत्य के प्रति स्थिर भक्ति रखें। हमेशा हंसमुख होना चाहिए। सत्य के प्रति स्थिर भक्ति रखें। हमेशा हंसमुख होना चाहिए।
इसलिए ब्रह्म को जानने से मुक्ति का मार्ग प्रसस्थ हो जाता है। इसलिए ब्रह्म को जानने से मुक्ति का मार्ग प्रसस्थ हो जाता है।
और बाक़ी तीन ओर समुद्र से घिरा सब मिलाकर न्यारा देश हमारा है। और बाक़ी तीन ओर समुद्र से घिरा सब मिलाकर न्यारा देश हमारा है।
नदी से झट ही बिदाई लेकर जल-चिंता पर अटल लौटा। नदी से झट ही बिदाई लेकर जल-चिंता पर अटल लौटा।
लड़कियों को परायों को सौंपना लड़कों को छाती से चिपकाकर रखना , लड़कियों को परायों को सौंपना लड़कों को छाती से चिपकाकर रखना ,
न कहीं आना न जाना न खेलने की जगह ज़माना ही पलट गया। न कहीं आना न जाना न खेलने की जगह ज़माना ही पलट गया।
बोल ना तू किस मिट्टी की बनी है..? कल जब मैं बीमार थी जाने कैसे तुझे खबर लग गई बोल ना तू किस मिट्टी की बनी है..? कल जब मैं बीमार थी जाने कैसे तुझे खबर ल...
माना था मेरी आवाज़ में थोड़ी कटुता हृदय से भी था थोड़ा कठोर माना था मेरी आवाज़ में थोड़ी कटुता हृदय से भी था थोड़ा कठोर
इस कोलाहल की नगरी में, बस एकाकीपन का ज्ञान नहीं ! इस कोलाहल की नगरी में, बस एकाकीपन का ज्ञान नहीं !
मेरे मन का सुकून है, मेरी आँख का तारा है, मेरे कानों की ध्वनि है। मेरे मन का सुकून है, मेरी आँख का तारा है, मेरे कानों की ध्वनि है।
फिर भी तितली तेरी नचनी मेला है दर्शक दल को॥ फिर भी तितली तेरी नचनी मेला है दर्शक दल को॥
रानी के मन सागर भीतर क्लेश कथा थी काँटों की।। रानी के मन सागर भीतर क्लेश कथा थी काँटों की।।