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manisha suman

Children Stories

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manisha suman

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ठंडी छांव

ठंडी छांव

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ठंडी शीतल चले बयार, 

याद आए गाँव के बरगद की छाँव,

कितनी पावन सुबह थी ,

गुनगुनाती थी वह शाम, 

यादों मे बसी रही बरगद की छाँव, 

बचपन खेल खिलौने छूटे, 

छूटा अपना प्यारा गाँव, 

बस याद आए बरगद की ठंडी छाँव, 

नदीयों की वह पगडंडियाँ, 

खेतों की संकरी गलियाँ , 

बस सपनों में रह गई बरगद की वह छाँव,

उसपर झूला झूला करते थे ,

जटाओं को पकड़ झुलते थे, 

ख्वाबों में याद आती बरगद की ठंडी छाँव,

पूजा करती दादी, मम्मी ,

बाँध कलावा लेती परिक्रमा, 

सदा रहे आबाद बरगद की ठंडी छाँव, 

तोता, मैना ,कौआ का घर, 

कितना सुंदर था अपना बचपन, 

कोई शहर में लादे बरगद की ठंडी वह छाँव।



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