STORYMIRROR

Pradnya Kulkarni

Fantasy

3  

Pradnya Kulkarni

Fantasy

इसी घर के अंदर कभी

इसी घर के अंदर कभी

1 min
212

इसी घर के अंदर कभी

बहुत चहलपहल हुआ करती थी


इसी घर के अंदर कभी

नटखट बचपन का शोर हुआ करता था


इसी घर के अंदर कभी

शादी-त्यौहारों का मौसम हुआ करता था


इसी घर के अंदर कभी

खुशियों का बसेरा हुआ करता था


उसी घर की सिर्फ एक याद 

रह गया है ये दरवाज़ा

और अनगिनत सुनहरी यादों को 

समेटे रखा है इस छोटे से ताले ने।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy