STORYMIRROR

इश्क़ की जंग

इश्क़ की जंग

1 min
372



दिल तोड़ने के खेल में

गलत शख्स को चुना है तूने

मैं शीशा नहीं जो टूटकर बिखर जाऊंगी

मत कर कद्र तू मेरी

मेरी चाहत की तो दुनिया दिवानी है

मैं तो खुशबु का वो झोंका हूँ

जिधर चाहूँ महक जाऊंगी

तुझे गुरुर किस बात का है

कैसे सोच लिया तूने

तेरी बेरुखी से बिखर जाऊंगी

इश्क़ की जंग में तू मुझे हरा नहीं सकता

ये बात और है

मैं खुद को हारकर भी तेरी जीत चाहूंगी


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance