STORYMIRROR

Dr.Pratik Prabhakar

Romance

3  

Dr.Pratik Prabhakar

Romance

इश्क़ है

इश्क़ है

1 min
231

आज तक था अकेला ही 

लगेगा दिलों का मेला भी 

दिखा मुझे वह पहली बार 

बताऊं दिल क्या झेला जी।।


हंसती खिलाती मोरनी सी

 हसरते उससे जोड़नी थी 

क्या कह दे इश्क है तुमसे 

खत्म करें मन का झमेला ही।।



पहली नजर में ही प्यार हुआ 

एक बार में ही कई बार हुआ 

दिल में समुंदर सी लहर उठी

तोड़ा सीमाओं का रेला ही।



पर अब मैं कैसे बताऊं उसे ?

कैसे इश्क को जताऊं उसे 

वह शर्माती इसलाती बलखाती

 मिलना किस्मत का खेला ही।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance