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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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इश्क और तुम

इश्क और तुम

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मेरा झुमकों से इश्क़

और उसका मेरे खातिर

झुमकों की दुकान पर रुक जाना।

कौन सा मुझ पर जॅंच रहा है,

कौन सा नहीं,ये बताना।


और कभी-कभी तो मेरे लिए 

खुद भी झुमके लाना


हाॅं उसनें चाॅंद तारों के खोखले वादे नहीं किए ,

पर जब पहली दफा,उसके ज़िद करनें पर

मैंने बताया था कि,

तोहफा देना ही है तो झुमके लाना।


और तबसे ये सिलसिला जारी है,

उसका खुद या मेरे साथ,

झुमकों की दुकान में ठहर जाना


जब वो मेरे संग होता है,

झुमकों की दुकान पर।

उसका मासूम सी शक्ल बनाना,

या खुदा,

इतना प्यारा प्रियतम दिया है तूने मुझे,

मेरे सारे अच्छे कामों और व्रतों का फल उसे दे,

उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे,

सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना।



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