इस सफ़र में तुम साथ न होते
इस सफ़र में तुम साथ न होते
इस सफ़र में तुम साथ न होते
तो शायद एहसास भी न होता हमें
ज़िन्दगी में मोहब्बत की अहमियत का।
यूं ही भटकते रह जाते हम उम्र भर
कभी एहसास ही नहीं कर पाते इसका,
कि हर पल में यहाँ ज़िंदगी नाम है जीने का।
ख़्वाब तो कई देखे थे इन आँखों में
पर तन्हा थे वो ख़्वाब, थे कुछ अधूरे से भी
तुम जो मिले एक किनारा मिला उन ख़्वाबों को।
जीवन का उपवन था मुरझाया सा
तुमसे ही मुझ तक आने का रास्ता मिला
मेरे जीवन के उपवन से भटकी हुई खुशियों को।
यह सब असर है तुम्हारे साथ का
जिसने जीना सिखाया, विश्वास जगाया,
और एक आसमानी उड़ान दी मेरे हौसलों को।
अविरल बहती जाऊँ तुम्हारी प्रेम धारा में
उम्र भर इसी तरह कि तुमने ही तो है संभाला
हर पल मेरी खुशियाँ मेरे दर्द मेरी मुस्कुराहटों को।
तुम समझ जाते हो मेरी खामोशियाँ भी
मैं कुछ कहूँ या न कहूँ आँखों में पढ़ लेते हो
कैसे तुम मेरे दिल की बातों को मेरे जज्बातों को।
हर बात निराली है तुम में सबसे अलग
तुमसे मिलकर समझ आया किस्मत क्या है
और पहली बार जाना इन किस्मत की लकीरों को।
तुम इस जिंदगी के सफर में हमसफ़र
मेरे हमराही न होते तो यकीन ही नहीं होता
की खूबसूरती से भी जिया जाता है इस ज़िंदगी को।

