इस दिल को थोड़ा तो समझा जाओ ना
इस दिल को थोड़ा तो समझा जाओ ना
गुज़ारी हैं हर रात मैने, तुम्हारी यादों के सहारे
मोहब्बत में सनम, लिखी हैं हर नज़्म तुम्हारे।।
तस्वीरों में डूबी हूँ सनम, कभी तो रु ब रू आओ न,
मिलन पूरा न कर सके तो क्या बस
एक कातिलाना इशारा तो कर जाओ ना।।
रहती हुँ अक्सर ख़यालो में तुम्हारे,
कुछ वक्त का तो सुकूँ दे जाओ ना,
ज्यादा न सही साथ बैठ कर
एक हसीन सा लम्हा तो दे जाओ ना।।
ख्वाहिशें एक तरफा रखूंगी सारी और
तुमसे मोहब्बत भी बेशुमार करूंगी
तुम बस एक पल के लिए ही मुझे
थोड़ा प्यार कर जाओ ना।।
आँखों मे आँखों न मिलाओ भले ही
पर हाथों में हाथों रख कर
इस रूह को तो खुश कर जाओ ना।।
जाना, बस इस दिल को थोड़ा तो समझा जाओ ना।।

