इस दहर सुकून की तलाश
इस दहर सुकून की तलाश
फिर चिल्लाया है मतवाला ऐरावत,
जोर से चाबुक चलाया है महावत !
मैंने महावत से पूछ लिया एक बात ,
क्या ढूंढने निकले हो सरकार !
तो बोला, शांति की है तलाश ,
कहाँ मिलेगा इधर आसपास !
मैंने कहा... खोजना व्यर्थ है ,
लौट आओगे खाली हाथ !
इस दहर अमन की तलाश करते हो,
कैसी अजगुत है यह बात !
