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V. Aaradhyaa

Abstract

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V. Aaradhyaa

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इस दहर सुकून की तलाश

इस दहर सुकून की तलाश

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फिर चिल्लाया है मतवाला ऐरावत,

जोर से चाबुक चलाया है महावत !


मैंने महावत से पूछ लिया एक बात ,

क्या ढूंढने निकले हो सरकार !


तो बोला, शांति की है तलाश ,

कहाँ मिलेगा इधर आसपास !


मैंने कहा... खोजना व्यर्थ है ,

लौट आओगे खाली हाथ !


इस दहर अमन की तलाश करते हो,

कैसी अजगुत है यह बात !



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