STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

3  

Surendra kumar singh

Abstract

इंद्रधनुष

इंद्रधनुष

1 min
245

यूँ तो अक्सर

कभी कभी दिख जाता है

इंद्रधनुष आकाश में।


जल से प्रकाश

का आवर्तन

जगमगाता हुआ विविध रंगी

आकार,आकाश में।


लेकिन ये कुछ नया है

भाव घुल रहे हैं

दया, करुणा, स्नेह

ममत्व घुल रही है

मनुष्यता में


और प्रेम जगमगा रहा है

मन के आकाश से

विचारों के आकाश तक

यूँ ही नहीं


मुस्कराहट बिखरती है जीवन में

उग आता है

इंद्रधनुष प्रेम का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract