इक जहां ऐसा भी हो
इक जहां ऐसा भी हो
जीत तो हो पर
हार न हो,
गलत कोई व्यवहार न हो,
हो ऐसा जहां,
इस जहां से परे,
जहां प्रेम के सिवा
कुछ स्वीकार न हो।।
जहां गर आंसू गिरें
तो बस हों खुशी से भरे,
जहां ज्वाला जले,
तो रिश्तों में संवेदना भरे
जहां प्रतिष्ठा तो हो पर
अहंकार न हो,
हो ऐसा जहां,
इस जहां से परे,
जहां प्रेम के सिवा
कुछ स्वीकार न हो।।
जहां ईर्ष्या ना हो, प्रपंच न हों,
मिथ्या भरे कोई मंच न हों,
इक शब्द का मतलब हो बस एक ही,
सर तो हो , सरपंच न हो
जहां ईश्वर की ज्योति प्रकाशित सदा,
क्षन एक कहीं अंधकार न हो,
हो ऐसा जहां,
इस जहां से परे,
जहां प्रेम के सिवा
कुछ स्वीकार न हो.....
