ईश्वर
ईश्वर
कहते है ईश्वर अनजान है
पर वो तो है है साफ़ साफ़ द्र्श्य|
जरा अपने अंदर झाकों
उन गुणों को पहचानो |
वो गुण निकल कर आएंगे
जो भगवान तक ले जाएंगे|
वो विश्वास निकल कर आएगा
जो अंधविश्वास को हटाएगा||
फूल चढ़आऊँ की शराब
बकरा काटू की गाय,
सब भेद दूर हो जाएंगे ,
तुम्हे तुम्हारे भगवान
अपने अंदर ही मिल जाएंगे ||
