ईश्वर करते बेड़ा पार
ईश्वर करते बेड़ा पार
ध्यान सदा सद्गुण धरैं,
कर्म उसी अनुसार।
ईश्वर तेरे संग रह,
करते बेड़ा पार।।
बगिया सद्कर्मी सजी,
देते फूल सुगंध।
स्वर्ग भाव ने रच दिया,
जीवन का अनुबंध।।
अपनी चिंता छोड़ कर,
औरों को सुख देत।
ईश्वर देकर साथ खुद,
कष्ट सभी हर लेत।।
बाल रूप की बानगी,
होती अद्भुत मान।
भोले बचपन में बसे,
सदा स्वयं भगवान।।
क्षमादान करते रहे,
जो कर मन अभ्यास।
दुनिया उनकी मित्र हैं,
वे दुनिया के खास।।
कर्म-योग की साधना,
करके फल का त्याग।
खुशियाँ जीवन छा गयी,
जीवन सरसा फाग।।
परमारथ भी हो गया,
जब जीवन का अंग।
दुःख के सब बादल छँटे,
मिला ईश का संग।।
जिनने बाँटा प्रेम-धन,
जीवन में अनमोल।
दुनिया उनकी रस-भरी,
मीठे जिनके बोल।।
पर-पीडा़ को जानकर,
करते उसको दूर।
करनी उनकी धन्य है,
हो जाते मशहूर।।
पीड़ा औरौं की समझ,
जो करते परिहार।
जन-जन उनको ईश का,
मान रहे अवतार।।
