STORYMIRROR

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Drama Romance Fantasy

4  

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Drama Romance Fantasy

ईश्क को जिस्म लिखते हो

ईश्क को जिस्म लिखते हो

1 min
218

ईश्क को जिस्म लिखते हो 

जाओ जाओ मियां बड़े नापाक फितरत हो 


लम्हों के तहज़ीब को गुस्ताख़ी कहते हो 

मियां सैलाबों में तुम भी फसे लगते हो 


मसरूफ़ नहीं खुद में भी एक पल

मियां तुम तो अपने ही मुजरिम लगते हो


धो लो चेहरे कई बार पर

जमाल_ए_निगाह बताती है तुम रोए लगते हो


खून टपक रहे पानी बन बदन से तुम्हारे 

मियां तुम तो मरे लगते हो 


कितनी दफा खंजर चुभोया तुमने 

ज़र्रे ज़र्रे से घायल दिखते हों 


अब तो बता दो माजरा क्या है

मियां तुम कब्र से क्या कहते हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama