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Luxmi Gupta

Abstract Classics

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Luxmi Gupta

Abstract Classics

हवा

हवा

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ऐ हवा रुक जरा 

मुझे भी ले चल तू जाय जहाँ


 मेरे मन को ले उड़ा

 मैं हूं बिखरी यहां वहाँ

मुझे समेट के ले चल

किसी दूसरे जहाँ।


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