STORYMIRROR

Luxmi Gupta

Abstract

3  

Luxmi Gupta

Abstract

दरबार

दरबार

1 min
311

जीवन क्या है 

ईश्वर का दरबार है


कही है मंत्री कहीं सिपाही

कहीं है हाथी घोड़े 


जीवन की इस डोर को

लेकर मानव यहाँ वहाँ दौड़े।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract