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Luxmi Gupta

Abstract

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Luxmi Gupta

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दरबार

दरबार

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जीवन क्या है 

ईश्वर का दरबार है


कही है मंत्री कहीं सिपाही

कहीं है हाथी घोड़े 


जीवन की इस डोर को

लेकर मानव यहाँ वहाँ दौड़े।


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