STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Romance

4  

Minal Aggarwal

Romance

हुस्न की मल्लिका

हुस्न की मल्लिका

1 min
228

कातिल 

तेरी नजर 

कातिल 

तेरी अदा 

कोई बताये


मेरा क्या कसूर 

यह दिल जो हुआ 

ऐसी हुस्न की मल्लिका पर

फिदा 

वह मेरी मोहब्बत को भी 

कोई गुनाह समझ बैठी 

कर बैठे तो हम 


बिना सोचे समझे प्यार तो 

इसमें इस नादान दिल की 

क्या खता 

राह में तेरी 

मेरा दिल पड़ा 

हो सके तो 


उठा ले

आगे बढ़कर 

गले लगाने को

कल पछताना न पड़े 

तुझको जो 

पीछे मुड़कर देखे और 

हम कहीं भी न दिखें फिर 

तुझको।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance