STORYMIRROR

Sunayana Borude

Romance Tragedy

4  

Sunayana Borude

Romance Tragedy

हर मंजर मे तुही...

हर मंजर मे तुही...

1 min
312

कहने को कुछ दुरिया है तुमसे

बाकी दिल तो तुमसे ही जूडा हुआ है

नजरो से कभी ओझल नही हो तुम

हर मंजर मे तुही बसा हुआ है..


मेरी पलके भी मुझसे करती है शिकायत 

अगर दिदार तेरा ना हो कभी,

कुछ कम रौशन सी लगती है ये दुनिया

तेरा चाँद सा चेहरा जब दिखता नही.

अब तो आसुओ मे भी 

हसी छलक जाती है...

क्युकी तेरा हसता हुआ चेहरा इन आखौ मे रेहता है

नजारो से कभी ओझल नही हो तुम

हर मंजर मे तुही बसा हुआ है....


किसी भी राह चलू

मंजिल बस तुम तक है

कोई भी ख्वाईश करु

फर्याद बस तुम तक है,

मेरी हसी, मेरी खुशी, सारे मकाम तुम तक है

तू यार नही खुदा है

मेरी दुनिया के सौ जहनो जैसा है....

नजरो से कभी ओझल नही हो तुम

हर मंजरमे बस तुही बसा है..


कहने को कुछ दूरियाँ है तुमसे

बाकी दिल तो तुमसे ही जूडा हुआ है

नजरों से कभी ओझल नहीं हो तुम

हर मंजर में तू ही बसा हुआ है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance