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Archana kochar Sugandha

Inspirational

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Archana kochar Sugandha

Inspirational

होली है

होली है

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वतन परस्त ने 

बड़े दिलकश अंदाज से 

चुराया होली का फाग हैं।


जिस्म में खून की आखिरी बूँद

और साँसों की आखिरी बची 

सांस में जगाया विश्वास हैं। 


मेरे नस-नस में बहने वाला 

सुर्ख खून का रंग 

मेरी अनवरत चलने वाली साँसों 

की गर्मी से उत्पन्न होनी वाली 

ऊष्मा के वाष्प कणों में 

घुल-मिलकर 

होली का रंग बनकर  

तब तक मेरे फौलादी बदन की 

बाल्टी में बहते रहना, 

जब तक मेरी शहादत 

तिरंगे में सराबोर न हो जाए । 


मेरी कलाई पर बंँधे बहन के 

रक्षाकवच के धागे का रंग

माता-पिता की आशीषों के सबल

तथा पत्नी की सुहाग की रक्षा में 

निकलने वाली प्रार्थनाओं के 

प्रवाह से उत्पन्न हुए 

सतरंग के सम्मिश्रण को 

मेरी शहादत के तिरंगे में 

समाहित करके

चहुँदिशी देना बिखेर ।

कोई आँख न करना नम 

यह तो वतन परस्तों की होली हैं ।



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