होली है आई
होली है आई
होली है आई, ढेरों संग खुशियाँ लेकर मेरे आँगन में,
गुलाल की रंग से देखो शर्मा गया है अब आसमान रे।
करो मज़ा और खाओ मिठाइयाँ और पीकर झूमो भाँग,
इज़्ज़त की चोली को बचाए रखो, ना लगने दो इसमें आग।
बुरा ना मानो होली कहकर सारे गिले शिकवा मिटा देना,
रंगों की आड़ में किसी को गंदी होली ना कोई खेलने देना।
रंगों के संग संग खुद को भी उड़ने का हौसला भर देना,
हे परिंदा! तू भी खुद को अब किसी से कम ना समझना।
जिस तरह आसमान भी झूम उठता है होली की रंगों से,
तू दुनिया को दिखा देना काबिलीयत की ऊँचाई क्या है।
मत मानना हार तू मेरे पंछी, तेरी दूरी बहुत ही लंबी है,
ऊँचाइयों की शिखर पर तेरा झंडा लहराना अब भी बाकी है।
रंग बरसेगा, हवाएं भी चीख चीख कर होली की मुबारक बात देगी,
गुलाल भी तुझे साथ लेकर उड़ने में अपनी खुशी व्यक्त करेगी।
