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✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Inspirational

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✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Inspirational

हमारी मातृभाषा हिंदी

हमारी मातृभाषा हिंदी

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सभी भाषाओं को जो खुद में समा ले

ऐसी है हमारी मातृभाषा हिंदी

जिसमें सबके लिए सम्मान है

ऐसी है हमारी मातृभाषा हिंदी


जो सबको समेट कर चले

जो सबका साथ दे

जो सबका उद्धार करे

ऐसी है हमारी मातृभाषा हिंदी 


हमारे देश की शान है

हिंदी से ही तो हिन्दुस्तान है

आज कल की पीढ़ी

इस बात से शायद अंजान है


क्यों भूल जाते हैं हम

हिंदी ही देश की जान है

हिंदी हैं हम 

हिंदी अपनी पहचान है 


कल कल बहती धारा सी ही

हमारी हिंदी का प्रवाह है 

मन से चंचल जैसे होता बालक

वैसे ही हिंदी का भी भाव है


हिंदी से है हिन्दुस्तान

जो है हम सब की जान

तिरंगे के ही रंग सी

सुनहरी है हिंदी की आन


हिंदी है हम सब की मां

मां से ही हम सब संतान हैं

हम तब तक ही महफूज हैं

जब तक मां के आंचल की छांव है


हिंदी की एक बिंदी में भी

एक अलग ही स्वभाव है

हम हिंदुस्तानियों का

हिंदी से प्रेम भाव है


अपनी मातृभाषा छोड़ कर सब

विदेशी भाषा की ओर हैं दौड़े

आखिर उन अंग्रेजों ने ही

लगवाए थे कितनी तकलीफों के डेरे


जीना भी जब मुश्किल सा था

तब हिंदी ही साथ थी

छोड़ दो विदेशी भाषाओं को

हिंदी ही रहेगी साथ सदा


हिंदी में संसार है

हिंदी में संस्कार है

हिंदी ही अपनी बोली है

हिंदी से ही तो प्यार है 


अपनी मां का सम्मान करना

हमारी ही जिम्मेदारी है

जब तक जां है जिस्म में

हिंदी को ही सर्वोपरि रखने की तैयारी है


एक क्रांति चाहिए

जो हिंदी को उसका

अधिकार वापस दिला सकें

हो इतना मजबूत इरादा अपना

कि कोई ना हमें हिला सके


कर लीजिए अपना हौसला बुलंद

हिंदी को उसका सम्मान दिलाना है

कोई भी चाहे अब आ जाए

हमें ही हिंदी को उसका अधिकार दिलाना है।



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