हम
हम
हम
खामोश नहीं तैयार हैं हम,
हर मौसम में बरसात हैं हम,
इस देश के पहरेदार हैं हम,
पूरे विश्व में प्रचार हैं हम ।
सत्य और अहिंसा के कर्जदार हैं हम,
अपने भारत देश के वफादार हैं हम,
समझना न तुम हमें, ऐसा वैसा,
चौबीस घंटे के पहरेदार हैं हम ।
हर आतंकवाद, और नक्सलवाद
हर हिंसा, और हर विद्रोह के लिए
ठोस दीवार हैं हम,
हर पल इससे लड़ने को तलवार हैं हम,
मरने और मारने को तैयार हैं हम ।
ईद, दीपावली से हमें कोई नाता नहीं,
तीज त्यौहार, हमें कोई भाता नहीं ,
वेद पुराण हो या हो या गीता कुरान ,
इन सबका करते हैं सम्मान हम ।
ज्यादा इनसे रखते कोई नाता नहीं,
बस कर्तव्य एक ही हमें निभाना है
इस धरती को हर हाल में बचाना है
चाहे शीश कटे या जाये यह प्राण ।
हर सूरत में लड़ना है स्वीकार हमें,
जीना है स्वीकार तो मरना भी है स्वीकार हमें ,
इस भारत माँ के लाल है हम
अपने भारत के पहरेदार है हम ।
