STORYMIRROR

Sudhakar Mishra

Romance

4  

Sudhakar Mishra

Romance

हम - तुम

हम - तुम

1 min
301

ज़िंदगी चार दिन की है तो क्या हुआ

साथ तुम दो अगर वक्त कट जायेगा

दो क़दम हम चलें दो क़दम तुम चलो

ज़िंदगी का सफ़र यूं ही कट जायेगा

      

शाख पे देखो बैठे हैं बुलबुल औ गुल

साथ में गुफ्तगू हैं किए जा रहे

थोड़ा मेरी सुनो थोड़ा तुम कुछ कहो

कहते - सुनते यूं जीवन संवर जायेगा

      

क्या है कहता ज़माना हमे क्या ख़बर

अपनी धुन में मगन हम जिए जा रहे

राह फूलों की हो या हो कांटो भरी

वक्त जैसे भी गुज़रे गुज़र जायेगा

      

ग़म मिले या खुशी ये तो रब की खुशी

उसकी हर इक रज़ा में भी राजी हैं हम

भूल से भी न हो भूल हमसे कोई

खुद - ब - खुद अपना परचम फहर जाएगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance